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लक्जरी ट्रेनों से भारत-भ्रमण
August 27, 2018 • Navlekha Team

सन् 1844 से भारतीय रेल की समृद्ध विकास यात्रा रही है। सन्  1853 में पहली यात्री-ट्रेन सेवा का बम्बई और ठाणे के बीच उद्घाटन हुआ था। उसके अगले वर्ष भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड डलहौजी ने देश के प्रमुख क्षेत्रों को आपस में जोड़ने के लिए एक नयी योजना तैयार की। आज भारतीय रेल दुनिया में सबसे बड़ी और व्यस्ततम रेलनेटवर्को में से एक है; क्योंकि प्रतिदिन एक करोड़ 80 लाख से अधिक लोग रेल से यात्रा करते हैं और 20 लाख टन से अधिक माल की ट्रेनों द्वारा ढुलाई होती है। यह पूरे देश को आपस में जोड़ती है यानी 64,000 किलोमीटर से अधिक के विशालकाय रेल-मार्गों पर दौड़ती है। 16 लाख कर्मचारियों के साथ भारतीय रेलवे दुनिया का सबसे बड़ा नियोक्ता है।

लक्जरी ट्रेनों से भारत-भ्रमण काफी लोकप्रिय हो गया है। यह देशभर में भ्रमण करने का सर्वोत्तम आरामदेह तरीका है। ये लक्जरी ट्रेनें आराम की हर सुविधा उपलब्ध कराती हैं और भारत के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन-स्थलों के परिभ्रमण में पर्यटकों को शानो-शौकत का एहसास कराती हैं। रेल मंत्रालय के सार्वजनिक उपक्रम भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) और कोक्स एण्ड किंग्स इण्डिया लि. ने लक्जरी-यात्रा के लिए दुनिया में सर्वश्रेष्ठ सेवा ‘महाराजा एक्सप्रेस' प्रदान करने के लिए एक दूसरे से हाथ मिलाया है। यह ट्रेन भारत में पहले से मौजूद लक्जरी ट्रेनों की श्रृंखला में अगली और नवीनतम कड़ी है।

महाराजा एक्सप्रेस

महाराजा एक्सप्रेस सेवा मार्च, 2010 में शुरू हुई है। इस ट्रेन में चढ़ते ही एक अनोखी अनुभूति का एहसास होता है। यह ट्रेन रात के दौरान चलती है ताकि दिन के समय लोग पर्यटन-स्थल घूम सकें।

इस ट्रेन में कुल 23 डिब्बे हैं। इसमें पाँच डीलक्स कोच, छह जूनियर सुइट कोच, दो सुइट कोच और एक प्रेसिडेंसियल सुइट कोच है। ट्रेन में दो रेस्तराँ, एक बार, एक आब्जरवेशन लाउंज है। इस लाउंज में बार, गेम टेबल आदि जैसी सुविधाएँ हैं।

ट्रेन के अन्य अनोखे पहलुओं में हर डिब्बे में सस्पेंशन सिस्टम, तापमान नियंत्रित सवारी केबिन, पर्यावरण-अनुकूल शौचालय और सीधे डायल वाले टेलीफोन शामिल हैं। केबिन में बड़े शीशे लगे हैं जिससे लोग बाहर की एक झलक पा सकते हैं। केबिन में एलसीडी टेलीविजन, डीवीडी प्लेयर, इंटरनेट-जैसी सुविधाएँ भी मौजूद हैं।

इस लक्जरी ट्रेन की एक अलग पहचान यह भी है कि यह विभिन्न राज्यों से होकर गुजरती है। इसके मुम्बई से दिल्ली और दिल्ली से कोलकाता- ये दो रूट हैंऔर दोनों रूटों पर यह दोनों दिशाओं में चलती है। यह मुम्बई से राजस्थान होते हुए दिल्ली आती है। यह खजुराहो एवं वाराणसी होते हुए दिल्ली से कोलकाता जाती है। महाराजा एक्सप्रेस के लिए चार पैकेजप्रिंसली इंडिया (आठ दिन, सात रातें), रॉयल इण्डिया (सात दिन, छह रातें), क्लासिकल इण्डिया (सात दिन, छह रातें)और सेलेस्टियल इण्डिया (आठ दिन सात रातें) हैं।

प्रिंसली इण्डिया टूर

प्रिंसली इण्डिया पश्चिमी भारत और ऐतिहासिक ताजमहल की विहंगम यात्रा कराती है। अनन्त काल की परम्पराओं और मनमोहक स्थानों को निहारते हुए लोग मुम्बई की भाग-दौड़भरी जिंदगी, दिल्ली के स्मारकों, ताजमहल का शाश्वत सौन्दर्य, रणथंभौर के बाघ, आमेर का किला देख सकते हैं और झीलों के शहर उदयपुर की झलक पा सकते हैं।

रॉयल इण्डिया टूर

रायल इण्डिया, महाराजा एक्सप्रेस राजाओं के भारत का अनोखा दृश्य दिखाता है- ताजमहल, रणथंभौर, गुजरात और अंततः मुम्बई । इस शानदार यात्रा से लोगों के दिमाग पर प्राचीन भारत और उस समय की संस्कृति । की अमिट छाप पड़ती है।

क्लासिकल इण्डिया टूर

लोकप्रिय यात्राओं में से एक यह टूर लोगों को भारत के छुपे ख़ज़ाने का दर्शन कराता है। यह यात्रा दिल्ली के अविस्मरणीय प्राकृतिक दृश्य से शुरू होती है और ग्वालियर के वैभवशाली अतीत, वाराणसी की पवित्र भूमि, खजुराहो के मन्दिर, गया के तीर्थ-केंद्र तथा बांधवगढ़ नेशनल पार्क के विविध वन्य जीवों का दर्शन कराती हुई पूर्व के हृदय समझे जानेवाले कोलकाता में जाकर खत्म हो जाती है।

सेलेस्टियल इण्डिया टूर

सेलेस्टियल इण्डिया टूर व्यक्ति को भारत के आकर्षक और पुरातात्त्विक संरचनाओं का दर्शन कराता है। इस दौरान गया के हिंदू मन्दिर, वाराणसी में गंगा नदी में नौकायन, बांधवगढ़ वन्य जीवों के दर्शन, खजुराहो, आगरा, ग्वालियर एवं दिल्ली के ऐतिहासिक आश्चर्य का विहंगम दृश्य देखने का अवसर मिलता है।

लक्जरी ट्रेन से देशाटन का अनुभव ऐसा है मानो हमें हमारी समृद्ध एवं विविधताभरी भूमि का सच्चा दर्शन हो रहा हो।